रायपुर, 26 जून 2026/ MGNREGA: A major achievement! 185 wells constructed in two years… farmers gain vital irrigation support.
MGNREGA : महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत जल संरक्षण और ग्रामीण परिवारों की आजीविका को सशक्त बनाने के उद्देश्य से जिले में निजी कुओं का निर्माण कराया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में जिले में कुल 185 निजी कुओं का निर्माण किया गया है, जिससे अनेक ग्रामीण परिवारों को सिंचाई की स्थायी सुविधा उपलब्ध हुई है।
सिंचाई की उपलब्धता बढ़ने से फसल उत्पादन में सुधार होने के साथ-साथ सब्जी एवं बाड़ी जैसी अतिरिक्त आजीविका गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है। इससे किसानों की आय बढ़ने की नई संभावनाएँ विकसित हुई हैं और वे आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
यह पहल केवल किसानों की आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जल संरक्षण एवं जल संचयन की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो रही है। भूजल स्तर की सतत निगरानी के लिए प्रतिवर्ष मानसून से पहले और मानसून के बाद ‘जलदूत एप’ के माध्यम से नवीन एवं पूर्व से निर्मित सभी निजी कुओं का जलस्तर मापन दर्ज किया जा रहा है। इससे जल संसाधनों के संरक्षण और प्रभावी प्रबंधन में भी मदद मिल रही है।
क्यों जरूरी है वाटर रिचार्जिंग?
देश के कई हिस्सों में बारिश के बावजूद भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण वर्षा के पानी का सीधे नालों और नदियों के जरिए बह जाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बारिश के पानी को जमीन के भीतर पहुंचाने की व्यवस्था की जाए तो आने वाले वर्षों में जल संकट की गंभीरता को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
भूजल हमारे पीने, खेती और दैनिक जरूरतों का प्रमुख स्रोत है। लगातार बढ़ते शहरीकरण, कंक्रीट के फैलाव और अत्यधिक दोहन के कारण जमीन के भीतर मौजूद जल भंडार तेजी से खाली हो रहे हैं। ऐसे में वाटर रिचार्जिंग प्राकृतिक जल चक्र को संतुलित रखने का प्रभावी उपाय बनकर उभरी है।
वाटर रिचार्जिंग से क्या फायदे होते हैं?
- भूजल स्तर में सुधार होता है।
- बोरवेल और हैंडपंप लंबे समय तक पानी देते हैं।
- गर्मियों में पेयजल संकट कम होता है।
- किसानों को सिंचाई के लिए बेहतर जल उपलब्धता मिलती है।
- शहरी क्षेत्रों में जलभराव की समस्या को कम करने में मदद मिलती है।
- भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित होता है।
कैसे किया जा सकता है वाटर रिचार्ज?
विशेषज्ञों के अनुसार, घरों की छतों से गिरने वाले वर्षा जल को पाइप के माध्यम से रिचार्ज पिट, सोख्ता गड्ढे या पुराने कुओं तक पहुंचाकर आसानी से भूजल में समाहित किया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब, खेत-तालाब और निजी कुओं का निर्माण भी जल संरक्षण का प्रभावी माध्यम साबित हो रहा है।
बदलती सोच की जरूरत
जल विशेषज्ञों का कहना है कि पानी बचाने की जिम्मेदारी केवल सरकारों की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भी है। यदि हर घर और संस्थान वर्षा जल संचयन और वाटर रिचार्जिंग को अपनाए, तो आने वाले समय में जल संकट की चुनौती को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
