रायपुर,24 जून 2026/ ETrendingIndia / “Blow to Trump from the Senate: Resolution passed to end military action against Iran…“अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान युद्ध के मामले में सीनेट से तगड़ा झटका लगा है। सीनेट ने एक प्रस्ताव पारित कर ट्रंप प्रशासन से ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य अभियान को रोकने या आगे की कार्रवाई से पहले कांग्रेस (अमेरिकी संसद) की मंजूरी लेने का आह्वान किया है।
इस प्रस्ताव का 4 रिपब्लिकन सांसदों ने भी समर्थन किया है। सीनेट के इस कदम से संदेश गया कि युद्ध को कांग्रेस का समर्थन नहीं है।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में इस महीने की शुरूआत में प्रस्ताव को समर्थन मिला था, जिसके बाद इसे रिपब्लिकन बहुमत वाली सीनेट में भी पेश किया गया।
इस दौरान सदन ने 50 के मुकाबले 48 मतों से प्रस्ताव को पारित कर दिया। सीनेट में सभी डेमोक्रेट सांसदों के अलावा रिपब्लिकन पार्टी के 4 सांसदों ने भी पार्टी लाइन से हटकर प्रस्ताव को समर्थन दिया, जिससे प्रस्ताव पारित हुआ।
हालांकि, यह प्रयास प्रतीकात्मक है। इसके कानून बनने की उम्मीद नहीं है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के 1973 में युद्ध शक्ति संकल्प को आमतौर पर युद्ध शक्ति अधिनियम के रूप में जाना जाता है।
इसके लागू होने के बाद से यह पहली बार था, जब कांग्रेस के दोनों सदनों ने राष्ट्रपति को शत्रुता से अमेरिकी सशस्त्र बलों को हटाने का निर्देश देने वाला प्रस्ताव पारित किया था।
यह एक समवर्ती प्रस्ताव है, इसलिए इस पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं है और परिभाषा के अनुसार, इसमें कानून का बल नहीं है।
रिपब्लिकन सांसदों में लुइसियाना के बिल कैसिडी, अलास्का की लिसा मुर्कोव्स्की, मेन की सुसान कॉलिन्स और केंटकी के रैंड पॉल ने समर्थन दिया। रिपब्लिकन 2 अन्य सांसद मिच मैककोनेल और पेनसिल्वेनिया के डेव मैककॉर्मिक के मतदान न करने से प्रस्ताव का रास्ता आसान हुआ।
युद्ध शक्ति अधिनियम के तहत पारित समवर्ती प्रस्ताव राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए व्हाइट हाउस नहीं भेजा जाता है। वर्ष 1973 के कानून में, कांग्रेस ने ऐसे प्रस्तावों को सैन्य अभियानों को समाप्त करने के एक तंत्र के रूप में स्थापित किया था, लेकिन कानूनी विशेषज्ञ इसे अनसुलझा बताते हैं। दरअसल, 1983 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ऐसे प्रस्ताव को कानूनी रूप से प्रभावी होने के लिए राष्ट्रपति के हस्ताक्षर या वीटो के लिए प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
व्हाइट हाउस ने जोर दिया कि युद्ध शक्ति अधिनियम संवैधानिक नहीं, इसलिए बाध्यकारी नहीं है। उसने कहा कि सीनेट में मतदान का कोई महत्व नहीं है क्योंकि प्रस्ताव राष्ट्रपति के पास नहीं जाते और विधेयक 2 रिपब्लिकन की अनुपस्थित से पारित हुआ है।
अधिकारी ने यह भी कहा कि प्रस्ताव में सेना को हटाने का निर्देश है, जिसे 7 अप्रैल को युद्धविराम के साथ समाप्त कर दिया गया था।
युद्ध शक्ति अधिनियम की संवैधानिकता का फैसला संभवत: अदालतों में होगा।
सीनेट से झटका लगने के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया ट्रुथ पर अपनी प्रतिक्रिया दी और बगावत करने वाले 4 रिपब्लिकन सांसदों को भी निशाने पर लिया।
उन्होंने लिखा कि उन्होंने ईरान को लगभग हरा दिया और वह सब कुछ देने को राजी था, लेकिन सीनेट ने बेवकूफी भरे समय में बेकार वोटिंग करवा दी। उन्होंने कहा की सीनेटरों ने उनका काम मुश्किल कर दिया है, लेकिन वह इसे पूरा करेंगे क्योंकि वह हमेशा अपना काम पूरा करते हैं।
अमेरिका अगर किसी सैन्य संघर्ष में जाता है तो उसे 60 दिन के अंदर अमेरिकी कांग्रेस अधिकृत करती है, जो 1973 के युद्ध शक्ति संकल्प में निर्धारित समयसीमा है।
इसके मुताबिक, अगर कांग्रेस उस समयसीमा से पहले युद्ध को अधिकृत नहीं करती, तो राष्ट्रपति को 60 दिनों में संघर्ष से लौटना होगा। ट्रंप ने 2 मार्च को ईरानी संघर्ष की जानकारी कांग्रेस को दी थी, जिसकी समयसीमा 2 मई तक थी। इसके बाद युद्ध के खिलाफ प्रस्ताव आया था।
