US-Canada Trade Deal: US-Canada trade deal collapses...! Even an offer of relief from 50% tariffs failed to seal the deal.US Canada Trade Deal
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रायपुर, 24 अगस्त 2026/ US Canada Trade Deal : अमेरिका और कनाडा के बीच ट्रेड डील की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। करीब एक सप्ताह तक चली बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच समझौता होते-होते अचानक टूट गया। खास बात यह है कि अमेरिका ने कनाडा को स्टील, एल्युमिनियम और कारों पर भारी टैरिफ में कटौती समेत कई बड़ी रियायतों का प्रस्ताव दिया था। इसके बावजूद दोनों देश अंतिम सहमति तक नहीं पहुंच सके।

50% टैरिफ घटाकर 25% करने का था ऑफर

अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमिसन ग्रीर के मुताबिक, अगर समझौता हो जाता तो कनाडा को अमेरिका के किसी भी दूसरे ट्रेड पार्टनर की तुलना में ज्यादा फायदा मिलता।

अमेरिका ने कनाडाई स्टील पर मौजूदा 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 25 प्रतिशत करने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि इस राहत के साथ एक शर्त भी थी। कम टैरिफ का लाभ तय मात्रा में अमेरिका भेजे जाने वाले कनाडाई स्टील को ही मिलना था। एल्युमिनियम के मामले में भी अमेरिका 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 25 प्रतिशत करने को तैयार था और इसमें किसी कोटे की शर्त नहीं रखी गई थी।

कारों पर भी बड़ी राहत की पेशकश

कनाडा से अमेरिका जाने वाली कारों पर फिलहाल 25 प्रतिशत टैरिफ है। अमेरिकी प्रस्ताव के तहत अगर कारों में एक निश्चित मात्रा में अमेरिकी सामान का इस्तेमाल होता, तो कनाडाई कारों पर टैरिफ करीब 7 प्रतिशत तक लाया जा सकता था। इसके अलावा स्टील और एल्युमिनियम से बने गोल्फ क्लब और बीयर कैन जैसे उत्पादों पर भी टैरिफ में 10 से 25 प्रतिशत तक की कटौती का प्रस्ताव था।

लकड़ी पर टैरिफ हटाने की भी पेशकश

अमेरिका ने कनाडाई सॉफ्टवुड लंबर यानी लकड़ी पर लगाए गए 10 प्रतिशत टैरिफ को हटाने का भी प्रस्ताव रखा था। इसके साथ ही कनाडा के डेयरी उत्पादों, वाइन, हॉकी स्टिक और कुछ अन्य सामान पर लगाए गए नए 50 प्रतिशत टैरिफ को रोकने की पेशकश भी की गई थी।

फिर क्यों टूट गई ट्रेड डील?

यहीं से बातचीत में पेंच फंस गया। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी प्रस्ताव को खराब डील बताया। उनका कहना था कि कनाडा अमेरिका की कुछ मांगों को मानने के लिए तैयार था, लेकिन बदले में अमेरिका की तरफ से पर्याप्त राहत नहीं मिल रही थी। कनाडा ने अपने जवाबी टैरिफ हटाने की दिशा में कदम उठाने और प्रांतों को अमेरिकी शराब की बिक्री दोबारा शुरू करने के लिए मनाने पर भी सहमति जताई थी।

लेकिन भारी ट्रकों, पिकअप और सेमी-ट्रकों को लेकर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन सकी। कनाडा ज्यादा राहत चाहता था। इसके अलावा कनाडा कारों में अमेरिकी और कनाडाई दोनों देशों की सामग्री के इस्तेमाल पर अतिरिक्त टैरिफ छूट की मांग कर रहा था।

टैरिफ के अलावा भाषा और संस्कृति भी बनी मुद्दा

बातचीत के अंतिम दौर में विवाद सिर्फ टैरिफ तक सीमित नहीं रहा। मार्क कार्नी के मुताबिक, अमेरिका ने कनाडा की संस्कृति और फ्रेंच भाषा की सुरक्षा से जुड़े मामलों में भी कुछ रियायतें मांगीं। अमेरिका की ओर से यह भी चाहा गया कि कनाडा दूसरे गैर-अमेरिकी देशों से आने वाले कुछ सामान पर लगाए गए टैरिफ को हटाए। कनाडा का मानना था कि इन रियायतों के बदले उसे पर्याप्त फायदा नहीं मिल रहा था।

‘अमेरिका ने बहुत ज्यादा मांगा, कम दिया’

मार्क कार्नी ने अमेरिकी प्रस्ताव पर स्पष्ट प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका ने बहुत ज्यादा मांग की और बदले में बहुत कम दिया। हालांकि अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमिसन ग्रीर ने इस दावे को खारिज कर दिया। उनका कहना था कि अमेरिकी प्रस्ताव कनाडा की मौजूदा बाजार पहुंच को बनाए रखने के साथ-साथ उसे और बेहतर बनाता।

अब आगे क्या होगा?

अमेरिका और कनाडा के बीच ट्रेड डील का टूटना दोनों देशों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। दोनों एक-दूसरे के महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार हैं। अगर टैरिफ को लेकर विवाद लंबा खिंचता है, तो इसका असर स्टील, एल्युमिनियम, ऑटोमोबाइल, लकड़ी, कृषि और अन्य क्षेत्रों पर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच बातचीत दोबारा शुरू होती है या टैरिफ विवाद और बढ़ता है, इस पर नजर रहेगी।


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