District Legal Services Authority initiative
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रायपुर , 27 मई 2026/ ETrendingIndia / District Legal Services Authority initiative: Then the broken relationship, the elderly couple returned to their loved ones after years / बुजुर्ग दंपत्ति पुनर्मिलन , समाज में बदलते समय के साथ जहां पारिवारिक रिश्तों में दूरियां बढ़ने की खबरें अक्सर सामने आती हैं, वहीं सूरजपुर से एक ऐसी भावनात्मक और प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने मानवता, पारिवारिक मूल्यों और संवेदनशील प्रशासन की मिसाल पेश की है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) सूरजपुर की सकारात्मक पहल ने एक बिछड़े वृद्ध दंपत्ति को फिर से अपने परिवार से मिला दिया।

जिला कोरिया के थाना पटना क्षेत्र निवासी वृद्ध दंपत्ति श्री शंकर प्रसाद और उनकी पत्नी ने जीवनभर अपने भाइयों के बच्चों को ही अपनी संतान मानकर स्नेह और जिम्मेदारियों के साथ उनका पालन-पोषण किया।

लेकिन समय के साथ उपजे पारिवारिक मतभेदों ने उन्हें अपनों से दूर कर दिया। परिस्थितियां ऐसी बनीं कि उन्हें अपना घर छोड़कर सूरजपुर के तिलसिवा स्थित ‘स्नेह सम्बल वृद्धाश्रम’ में आश्रय लेना पड़ा।

25 मई को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सूरजपुर की सचिव सुश्री पायल टोपनो ने वृद्धाश्रम का आकस्मिक निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान जब उन्होंने इस बुजुर्ग दंपत्ति की पीड़ा और उनकी परिस्थितियों को जाना, तो उन्होंने मामले को केवल एक औपचारिक प्रक्रिया न मानते हुए मानवीय संवेदनाओं के साथ तत्काल पहल की। प्राधिकरण द्वारा परिवारजनों से संपर्क स्थापित कर उन्हें वरिष्ठजनों के प्रति कानूनी दायित्वों के साथ-साथ नैतिक जिम्मेदारियों के बारे में समझाइश दी गई।

सार्थक काउंसिलिंग और संवेदनशील प्रयासों का असर

प्राधिकरण की सार्थक काउंसिलिंग और संवेदनशील प्रयासों का असर यह हुआ कि श्री शंकर प्रसाद के छोटे भाई श्री कृष्णा, उनकी पत्नी श्रीमती सुमित्रा और पुत्र स्वयं वृद्धाश्रम पहुंचे तथा बुजुर्ग दंपत्ति को ससम्मान अपने घर ले जाने की सहमति जताई।

वर्षों बाद अपनों को सामने देखकर वृद्ध दंपत्ति की आंखों में छलक आई खुशी और संतोष ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया।

इस अवसर पर तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री डायमंड कुमार गिलहरें तथा व्यवहार न्यायाधीश सुश्री हिमांशी सर्राफ विशेष रूप से उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम के दौरान नालसा की “वरिष्ठ नागरिकों के लिए विधिक सेवाएं योजना 2016” के अंतर्गत विशेष विधिक जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।

इसमें माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत वरिष्ठजनों को प्राप्त अधिकारों और कानूनी संरक्षण की विस्तृत जानकारी दी गई।

इस भावनात्मक पहल ने यह साबित कर दिया कि यदि संवेदनशीलता, संवाद और सकारात्मक प्रयास साथ हों, तो बिखरते रिश्तों को फिर से जोड़ा जा सकता है।