रायपुर, 4 जून 2026/ ETrendingIndia / “Eco-Friendly Roads Built from Fly-Ash: Chhattisgarh sets an example of green growth.” फ्लाई ऐश ग्रीन हाईवे – छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने की दिशा में उल्लेखनीय काम हो रहा है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने औद्योगिक कचरे के पुनर्चक्रण, जल संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा जैसे प्रयासों के जरिए सड़क निर्माण को पर्यावरण-अनुकूल बनाया है।
फ्लाई-ऐश से बनीं ग्रीन हाईवे
थर्मल पावर प्लांटों से निकलने वाली फ्लाई-ऐश (राख) का बड़े पैमाने पर उपयोग सड़क निर्माण में किया जा रहा है। वर्ष 2024-25 में 2.17 करोड़ मीट्रिक टन और 2025-26 में 62 लाख मीट्रिक टन फ्लाई-ऐश का उपयोग किया गया। इससे औद्योगिक कचरे का बेहतर उपयोग होने के साथ कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आई है।
ग्रीन हाईवे निर्माण
स्टील उद्योग के स्लैग, पुराने टायरों के रबर और बायो-बिटुमेन जैसी सामग्री को पुनर्चक्रित कर ग्रीन हाईवे निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे कचरे के निपटान की समस्या कम हुई है और प्राकृतिक संसाधनों की बचत हो रही है।

जल संरक्षण में भी नई पहल
राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे अमृत सरोवरों का निर्माण और जीर्णोद्धार किया गया है। वर्षा जल संचयन के लिए वाटर हार्वेस्टिंग पिट्स की संख्या बढ़ाई गई है तथा निर्माण कार्यों में शोधित जल का उपयोग कर स्वच्छ पानी की बचत की जा रही है।
वन्यजीवों के लिए सुरक्षित इन्फ्रास्ट्रक्चर
सीतानदी-उदंती अभ्यारण्य क्षेत्र में लगभग 3 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण किया जा रहा है, जिससे जंगलों पर यातायात का प्रभाव कम होगा। साथ ही साउंड बैरियर, मंकी कैनोपी, एलिफेंट पास और एनिमल अंडरपास जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, ताकि वन्यजीवों का प्राकृतिक आवागमन सुरक्षित रहे।
बी-कॉरिडोर और औषधीय वन से बढ़ेगी समृद्धि
हाईवे किनारे बी-कॉरिडोर विकसित कर मधुमक्खी पालन और प्राकृतिक परागण को बढ़ावा दिया जाएगा। वहीं खाली जमीनों पर नीम, तुलसी, एलोवेरा और आंवला जैसे औषधीय पौधों के मेडिसीन पार्क तैयार किए जा रहे हैं।
हरित राजमार्ग की ओर बड़ा कदम
“एक पेड़ माँ के नाम 2.0” अभियान के तहत छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे और डिवाइडरों पर 2.5 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं। यह पहल सड़क विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण का सफल उदाहरण बनकर उभरी है।
