रायपुर, 07 जून 2026/ Liquid Nano Fertilizer: Nano fertilizers are proving to be a game-changer for farmers! Learn the correct way to use Nano Urea and Nano DAP.
Nano Fertilizer Liquid : छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में अब खेती को आधुनिक और कम लागत वाला बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में केंद्र और राज्य सरकार किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रही हैं। नैनो तकनीक आधारित ये उर्वरक कम मात्रा में पौधों को जरूरी पोषक तत्व पहुंचाकर उत्पादन बढ़ाने में मदद करते हैं।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, नैनो उर्वरकों के संतुलित उपयोग से उर्वरक की खपत घटती है, खेती की लागत कम होती है और मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहती है।
क्या हैं नैनो उर्वरकों के फायदे?
नैनो यूरिया
- पौधों को नाइट्रोजन उपलब्ध कराता है
- पत्तियों की हरियाली और वृद्धि बढ़ाता है
- पारंपरिक यूरिया की जरूरत कम करता है
नैनो DAP
- फास्फोरस और नाइट्रोजन का प्रमुख स्रोत
- जड़ों के विकास और फूल-फल बनने में मददगार
- फसल की शुरुआती बढ़वार मजबूत करता है
नैनो जिंक
- जिंक की कमी दूर करता है
- पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
- दानों और फलों की गुणवत्ता सुधारता है
नैनो कॉपर
- पौधों की प्रतिरक्षा क्षमता मजबूत करता है
- फफूंद और जीवाणुजनित रोगों के नियंत्रण में मददगार
- पौधों की समग्र सेहत बेहतर बनाता है
ऐसे करें नैनो उर्वरकों का इस्तेमाल
1. बीज उपचार
बुवाई या रोपाई से पहले 5 मिली नैनो DAP को 1 लीटर पानी में मिलाकर बीज या पौधों की जड़ों का उपचार करें।
2. पहला छिड़काव (30-35 दिन बाद)
- नैनो DAP – 4 मिली प्रति लीटर पानी
- नैनो यूरिया प्लस – 4 मिली प्रति लीटर पानी
- नैनो जिंक – 1 मिली प्रति लीटर पानी
इन सभी को मिलाकर पत्तियों पर समान रूप से छिड़काव करें।
3. दूसरा छिड़काव (55-60 दिन बाद)
नैनो यूरिया प्लस 4 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।
4. नैनो जिंक और नैनो कॉपर
30-35 दिन की अवस्था में 100 मिली प्रति एकड़ की दर से उपयोग किया जा सकता है।
किसानों के लिए जरूरी सावधानियां
- प्रति एकड़ लगभग 125 लीटर पानी का उपयोग करें
- नैनो यूरिया 500 मिली प्रति एकड़ से ज्यादा न डालें
- सुबह या शाम के समय छिड़काव करें
- तेज धूप में स्प्रे करने से बचें
खेती में नई तकनीक से बढ़ेगा मुनाफा
सरकार का दावा है कि सही समय और सही मात्रा में नैनो उर्वरकों का उपयोग करने से किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन मिल सकता है। साथ ही मिट्टी का स्वास्थ्य सुरक्षित रहता है और पर्यावरण प्रदूषण भी कम होता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में नैनो तकनीक खेती की लागत घटाने और उत्पादन बढ़ाने का बड़ा माध्यम बन सकती है।
