रायपुर, 28 जुलाई 2026/ ETrendingIndia / देश में हवाई यात्रा करने वालों के लिए सफर महंगा हो गया है। सरकार के अनुसार, मार्च 2025 की तुलना में जून 2026 तक 72 घरेलू हवाई मार्गों पर औसत किराया करीब 20.5% (लगभग 21%) बढ़ गया है।
सरकार का कहना है कि विमान ईंधन, डॉलर विनिमय दर और परिचालन लागत में वृद्धि इसकी प्रमुख वजह है।
यह जानकारी नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने राज्यसभा में लिखित उत्तर में दी।
महंगे ईंधन और बढ़ी लागत का असर
विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में उतार-चढ़ाव।
विदेशी मुद्रा विनिमय दर का प्रभाव।
विमान लीज, उत्पाद शुल्क, वैट और अन्य परिचालन खर्चों में वृद्धि।
एयरलाइंस के कुल खर्च का 35–40% हिस्सा केवल ईंधन पर होता है।
किराए पर सरकार की नजर
डीजीसीए की Fare Monitoring Unit हर महीने 78 चयनित मार्गों के किरायों की निगरानी करती है।
उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एयरलाइंस घोषित सीमा से अधिक किराया न वसूलें।
यात्रा सस्ती बनाने के प्रयास
क्षेत्रीय संपर्क योजना ‘उड़ान’ के जरिए कम किराए में हवाई सेवा का विस्तार।
विमान रखरखाव व मरम्मत से जुड़े पुर्जों पर करों को तर्कसंगत बनाया गया।
राज्यों से विमान ईंधन (ATF) पर वैट कम करने का आग्रह।
क्या है इसका असर ?
त्योहारी सीजन और बढ़ती यात्रा मांग के बीच किराए में बढ़ोतरी से यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। हालांकि सरकार का कहना है कि किरायों में पारदर्शिता बनाए रखने और क्षेत्रीय हवाई यात्रा को किफायती बनाने के लिए निगरानी और सुधारात्मक कदम जारी हैं।
