तय कर लो तुम किसके साथ खड़े हो?
जो बंदूकें बना रहे हैं,
या जो ऑर्डर-ऑर्डर चिल्ला रहे हैं,
या जो उसे चला रहे हैं…
या फिर जो चोट खा रहे हैं?
तय कर लो…
क्योंकि इस आंदोलन में
मौन रहने वालों की सहभागिता भी
जुर्म से कम नहीं होती।
तय कर लो…
इतिहास जब पन्ने पलटेगा,
वह तुमसे तुम्हारी सहूलियत नहीं पूछेगा।
कलम उठाने से पहले, या कोई नारा लगाने से पहले…
तय कर लो तुम किसके साथ खड़े हो!
मनोज मौर्य
25- July 2026 / ETrendingIndia

रचयिता.. लगभग 20 वर्षों से माया नगरी मुंबई में फ़िल्म निर्माता, निर्देशक, कथाकार, गीतकार, लेखक के रूप में स्थापित मनोज मौर्य किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आपने कई फिल्मों का निर्देशन किया है। अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित मनोज जी को फाइन आर्ट, पेंटिंग्स, पर्यटन आदि इत्यादि के शौक और घुमक्कड़ मिज़ाज ने इन्हें अनुभवों की खान बना दिया है। उनकी कविताएं अपने आप संवेदनशील हृदय के द्वार से जैसे हवा की मानिंद बहने लगती हैं। आज के माहौल की मनःस्थिति को बयां करती ये कविता उसी की एक बानगी है….
