russian oil
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रायपुर 3 जून 2026/ ETrendingIndia / US May End Waiver on Russian Oil Purchases, Crude Supply Concerns Loom / रूसी तेल खरीद छूट – रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदने वाले भारत के लिए आने वाले दिनों में नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि वाशिंगटन रूसी तेल खरीद पर दी गई छूट (सैंक्शंस वेवर) को लंबे समय तक जारी रखने के पक्ष में नहीं है और इसे जल्द समाप्त करना चाहता है।

अमेरिकी सीनेट की फॉरेन रिलेशंस कमेटी की सुनवाई के दौरान रुबियो ने कहा कि रूसी तेल पर प्रतिबंध अमेरिकी नीति का हिस्सा है और मौजूदा छूट केवल एक अस्थायी व्यवस्था है।

उन्होंने कहा, “हम इस छूट को जितनी जल्दी संभव हो समाप्त करना चाहते हैं। इसे वैश्विक तेल आपूर्ति बनाए रखने के लिए दिया गया था।”

मौजूदा वेवर 17 जून को समाप्त होने वाला है। यह छूट पहली बार मार्च में लागू की गई थी और बाद में दो बार बढ़ाई गई।

यूक्रेन युद्ध और ईरान से जुड़े क्षेत्रीय तनावों के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए अमेरिका ने यह कदम उठाया था।

भारत इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभार्थी रहा है। पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद रूस ने भारी छूट पर कच्चा तेल बेचना शुरू किया, जिससे भारत दुनिया के प्रमुख खरीदारों में शामिल हो गया। इससे देश को कम कीमत पर ऊर्जा उपलब्ध हुई और घरेलू अर्थव्यवस्था को भी राहत मिली।

रुबियो ने स्वीकार किया कि इस छूट का लाभ केवल भारत को ही नहीं, बल्कि कई अन्य अर्थव्यवस्थाओं को भी मिला है। उनके अनुसार, रूसी तेल की आपूर्ति ने वैश्विक बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

हालांकि अमेरिका का लंबे समय से यह तर्क रहा है कि रूस के तेल निर्यात से मिलने वाला राजस्व यूक्रेन युद्ध को वित्तीय समर्थन देता है। इसी वजह से वाशिंगटन चाहता है कि भारत समेत बड़े आयातक देश धीरे-धीरे रूसी तेल पर अपनी निर्भरता कम करें।

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। अमेरिका का आरोप था कि भारत रूसी तेल खरीदकर अप्रत्यक्ष रूप से मॉस्को को आर्थिक सहायता पहुंचा रहा है।

व्हाइट हाउस की ओर से जारी एक फैक्ट शीट में दावा किया गया था कि भारत ने रूसी तेल के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आयात को रोकने की प्रतिबद्धता जताई है। हालांकि भारत सरकार ने सार्वजनिक रूप से ऐसी किसी भी प्रतिबद्धता की पुष्टि नहीं की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका भविष्य में प्रतिबंधों को लेकर नरम रुख अपनाता है, तो भारत को फिर से सस्ते रूसी तेल का लाभ मिल सकता है।

वहीं, यदि छूट समाप्त होती है तो भारत को वेनेजुएला, पश्चिम एशिया और अफ्रीकी देशों जैसे वैकल्पिक स्रोतों से तेल आयात बढ़ाने की रणनीति अपनानी पड़ सकती है।