रायपुर 12 जून 2026/ ETrendingIndia / “India: Unprecedented progress in the textile sector, expanded up to 190 billion dollars” केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने वस्त्र मंत्रालय की पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत के वस्त्र और परिधान क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव आया है और यह वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, नवाचार-आधारित तथा बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन करने वाले उद्योग के रूप में उभरा है।
प्रधानमंत्री का 5 एफ विज़न
मीडिया को संबोधित करते हुए श्री गिरिराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री के 5 एफ विज़न—फार्म से फाइबर, फाइबर से फैक्ट्री, फैक्ट्री से फैशन और फैशन से फॉरेन—के मार्गदर्शन में यह क्षेत्र मजबूत तथा किसानों, निर्माताओं, बुनकरों, कारीगरों और निर्यातकों को जोड़ने वाली एकीकृत मूल्य श्रृंखला के रूप में विकसित हुआ है।
350 बिलियन डॉलर का लक्ष्य
श्री सिंह ने बताया कि भारत का वस्त्र उद्योग 2025-26 में लगभग 190 बिलियन डॉलर तक विस्तारित हो चुका है और 2030 तक 350 बिलियन डॉलर के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में अग्रसर है।
घरेलू वस्त्र बाजार भी 2014-15 के लगभग 6 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर अब 16 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है, जो इस क्षेत्र के मजबूत विस्तार और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में इसके बढ़ते योगदान को दर्शाता है।
5.3 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार
उन्होंने कहा कि वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र वर्तमान में 5.3 करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान कर रहा है और अगले तीन वर्षों में इसके द्वारा लगभग 2 करोड़ अतिरिक्त रोजगार सृजित होने की संभावना है।
श्री गिरिराज सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार ने वस्त्र से संबंधित संपूर्ण इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने के लिए कई ऐतिहासिक सुधार और प्रमुख योजनाएँ लागू की हैं।
इनमें पीएम मित्र पार्क, उत्पादन-से संबंधित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना,राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (एनटीटीएम), वस्त्र निर्यात संवर्धन मिशन (टीईईएम), राष्ट्रीय फाइबर मिशन और कच्चा माल सहायता योजना (आरएमएसएस) शामिल हैं, जो निवेश, तकनीकी उन्नति, सतत विकास और निर्यात प्रतिस्पर्धा क्षमता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
कपास उत्पादकता मिशन शुरू
कपास किसानों की सहायता और उद्योग के लिए पर्याप्त कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु सरकार ने कपास उत्पादकता मिशन शुरू किया है तथा कपास पर आयात शुल्क को समाप्त कर दिया है।
निर्यात प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने के लिए आरओएससीटीएल और आरओडीटीईपी जैसी योजनाओं को लागू किया गया है।
मुक्त व्यापार समझौतों का दायरा 56 देशों तक पहुँचा
साथ ही, भारत के मुक्त व्यापार समझौतों का दायरा भी बढ़ा है, जो 2014 में 10 एफटीए के तहत 19 देशों तक सीमित था, अब बढ़कर 18 एफटीए के माध्यम से 56 देशों तक पहुँच चुका है। इससे निर्यात और निवेश के नए अवसर उत्पन्न हुए हैं।
135 देशों में निर्यात वृद्धि दर्ज
वैश्विक व्यापार चुनौतियों के बावजूद भारत अपने निर्यात गंतव्यों में विविधता लाया है और 135 देशों में निर्यात वृद्धि दर्ज की है।
श्री सिंह ने कहा कि भारत तकनीकी वस्त्रों के क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरा है, जहाँ राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन के तहत इस बाजार का आकार लगभग 6 बिलियन डॉलर से बढ़कर 25 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया है।
अनुसंधान, नवाचार, इनक्यूबेशन और उद्योग-शैक्षणिक सहयोग में बड़े पैमाने पर निवेश से भविष्य-उन्मुख वस्त्र इकोसिस्टम के निर्माण में मदद मिल रही है।
एकीकृत टेक्सटाइल पार्कों के विकास तथा प्रमुख राज्यों में स्थापित सात पीएम मित्र पार्कों के माध्यम से वस्त्र इकोसिस्टम के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। इनसे लगभग 70,000 करोड़ रुपये के निवेश आकर्षित होने और करीब 21 लाख रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है।
प्रौद्योगिकी उन्नयन पहलों से पावरलूम क्षेत्र को लाभ मिला है, जबकि राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट) ने अपना शैक्षणिक विस्तार किया है और भारत के फैशन एवं डिजाइन इकोसिस्टम को सशक्त बनाने के लिए विज़नेक्स्ट (VisioNxt) और इंडियासाइज (INDIASize) जैसी नवाचारी परियोजनाएँ शुरू की हैं।
श्री सिंह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियाँ भारत को एक कम लागत वाले उत्पादक से डिज़ाइन-आधारित, नवाचार-प्रेरित, सतत और निर्यात-उन्मुख वैश्विक वस्त्र केंद्र में तब्दील करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं.
राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम के तहत लगभग 2,000 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है, जिससे लाखों बुनकरों को उन्नत करघों, कौशल विकास, बुनियादी ढाँचे के सहायता तथा बेहतर बाजार पहुँच के माध्यम से लाभ प्राप्त हुआ है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम), इंडिया हैंडमेड पोर्टल, जीआई टैगिंग, मेगा हैंडलूम क्लस्टर्स और वीवर्स मुद्रा योजना जैसी पहलों ने आजीविका को मजबूत किया है तथा बिचौलियों पर निर्भरता को कम किया है।
उन्होंने कहा कि हस्तशिल्प क्षेत्र को क्लस्टर विकास, कौशल उन्नयन, कारीगर पहचान पत्र और विपणन पहलों के माध्यम से महत्वपूर्ण समर्थन मिला है, जिससे कारीगरों की उत्पादकता और आय में सुधार हुआ है।
